थरुवाके भक्ति

"बराटके उ रोज अविनास बरे सुग्घुर बिल्गाइ टहिंट । चन्डोलमे बैठल माठेम पगिया आंगेम जामा गोरम सुरुवाल ओ जुत्ता घल्ले ।हमार गाउँ पुग्जैठै ढो ढो पो पो बाजा बोलैटि माँगर गैटि डुल्हा अंगनामे प्रवेश कर्ठै  मनैनके मेला लागल रहट"


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थरुवाके भक्ति


कुछ बरस हुइल रहट । लर्का फेन खोब खेल्नाहा हुगैल रहट हुकिन बिस्राइ खोजु मने नै सेकु जत्रे कोसिस करु ओत्रे सब ठाउँ हुकिने हे डेखु । जहाँ जाउँ उहै अविनास से संगे हस लागे । जुगुर जुगुर चुल्हामे आगि बर्टि रहठ । मै महि चुल्हम लकेरल काठिहे ठिट्कोरे परे । कोनम लर्काहे लेके छाटिक डुढमे लगाके पसग्गा अगोर्ले आगि हेर्ले आँखिमसे आँस बहके गाल पुगल जाए । घर सुनसान भवाइल भवाइल लग्ना । कारण अविनास उ घरेमसे सडाके लाग बिडा लेके गैसेकल रहिट ।


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मै जिन्डगिक एक एक पलहे सम्झु । उ डिनके जोन डिन अविनासके बाबा हमार घर आके अपन पटुहिया बनाइक लगिन । मोर बाबा ओ अविनासके बाबा जाँरक खोरिया अगोरले खोपसे माँगर गैलक ओस्टके हमार ठकौनि खैलक । ओकर पाछे डुनु ओर भोजक् सामा हुइलागट । महिना डु महिना करट फागुन लागजाइट इहे महिनम हमार लग्गन रहे । जिन्गिम पहिला चो असिन खुशियालिक रोज रहे इ हमार जिन्गिक डोसर परगा रहे । आघे हम्रे डुइ शरिर रहि मने आपा एक हुइजाइटहि ।


बराटके उ रोज अविनास बरे सुग्घुर बिल्गाइ टहिंट । चन्डोलमे बैठल माठेम पगिया आंगेम जामा गोरम सुरुवाल ओ जुत्ता घल्ले ।हमार गाउँ पुग्जैठै ढो ढो पो पो बाजा बोलैटि माँगर गैटि डुल्हा अंगनामे प्रवेश कर्ठै  मनैनके मेला लागल रहट डुलहा राजा अविनासहे हेरक लाग । बराटिनके स्वागट कार्यक्रम सुरु हुइट हजारौंके बगाल लेके महि लेहे आइल रहिट अविनास । 


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महि अपन घर डुवार अपन जन्म घर अपन डाइ बाब सारा परिवार छोर्के जैना बेला आसेकल रहे । सम्झु टे रोइनास किल लागे अपन खेलल कुडल ठाउँ छोर्के डुर जाइटहुँ । एक ओर अविनास ओ सारा बराटक बगाल खानपिनमे रठैं । राट बिटठ बिहान हुइठ बराटिन पठैना कार्यक्रम हुइट उहे संगे मोर फेन बिडाई हुइना रहट । घरक सारा जहनके अनुहार डुःखी, रुनछुन डेखा पर्ठिन । आफन्ट सब कोइ आँस गिराइट टे कोइ  उँक्वार लेके रोइट हम्रे एक डोसरके माया मे खोप रोइठि ओ मोर बिडाइ हुइट संगे पठलह्रि फेन रठै मोर ससरार सम जैठाँ । उहाँ जाके परछना कार्यक्रम हुइट सबजे डुल्हा डुल्हि हेरब कहिके ढकेलिक ढकेला करिट । माँगर गओइया माँगर गाइट टे कोइ खेल्वार करे अस्टके उ राट बिटट् बिहान पठलह्रिनके बिडाइ हुइट । महि छोेके सबजे चलगिले उ रोज महि सुनसान लागल लावा घर लावा समाजमे मै अकेलि । अपन लग्गक मनै कना अविनास रहिट मोर सुख डुखके बाट सुडेहुइया ।  मै अपन सारा जिन्डगी अविनासहे सौप डेलेरहु मरम टे अविनासके संग जिअम टे अविनासके संग । अविनासके उक्वारमे सुटके अपन मनक बाट कर्ना करु । अविनास यि जिन्डगीक खेल जाने नै सेक्जाइठ । कब कहाँ कहाँ पुगा डेहठ कोइ जाने नै सेकठ । मै सोच्ले फेन नै रहुँ मै टुँहार जीवन जोर्या बनम ओ असिके हम्रे एक होप । मै इ घरक पटुहिया बनम सोच्ले फेन नै रहुँ । अविनास महि केवल संघरियाके नाटासे हेर्ना करिट तर अचानक कसिके हम्रे एक परिवार बने पुग्लि । अविनासके डाइ बाबा फेंन महि पटुहिया भेंटाके खुसि रठैं । 


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डिन अस्टे बिट्टि जाइट मै डुइ जीउक होजैठु मोर ससुइया बरे मजा रठिन । डाइ बाबाके एकलौटा छावा अविनास किल रहिट । मोर सासुइया महि अपन छाइ जस्टे मनिन । कहिन पटुहिया टैं मोर छाइ जस्टे हुइटे  मै छाइ ट पाइ नै सेक्नु मने टुहिन अपन छाइ जस्टे लागठ । मै फेन एक डिन टोर जस्टे अपन घर रहुँ एक रोज अपन डाइ बाबा, अपन जलम गाउँ छोर्के इ घर अइनु मै फेंन इ घरक पटुहिया हुँ ओ टै मोर पटुहिया  बन्ले । ठरुवक घर अइले से हजार बाट सुने परट, ओ सहे परठ मनेम चोट लागट डुःख लागट । घरक याड आइट डाइ बाबनके याड आइट । घरे घुम्लक खेल्लक जीउ भोज कर्लेसे इहाँक घरक बाट मे चले परट । 


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ससुइया मोर बहुट ख्याल करिन मैया करिन । अपने छाइ जस्टे व्यवहार कर्थिन । हर डु:ख मे साथ डेना ख्याल कर्ना हँसैना खेल्वार कर्ना मनैन के ठन मोर नाउ उठैना बानि मोर सुसियक मजा लागे । कबु काल टे ससुइया पतुहिया नचुनिया बन्जाइ कलेसे ससरुवा मन्डरिया । घर घरके नाच सुरुकरे लागि ।अस्तके हमार परिवारमे खुशि अाइल रहे । 



मै डुइ जिउक् होसेकल रहु । हँस्टि रमैटि समैमे अचानक एक रोज अविनास मोटर साइकल लेके गारिम टक्राइ पुग्लै । मोर खुशि पलभरमे हौरागैल मै भारि सोचमे परगैनु । एकओर मोर व्यठा लग्ना बेला ओहोर अविनास अस्पटालमे मृटयु से लरटहिट । एक ओर मै अस्पटालमे चिल्लाइटहुँ एक ओर अविनास टरपटि रहिंट । छावा जलमट ओहोर अबिनास इ डुनिया से विदा हुइलै महि छोरके मने अपन मायाके चिन्हा कोखमे डेकेगैलै । ओहे मारे मै छावक नाउँ अविरल ढर्नु । अविनास के माया सडा मोर संग रहे ।  ओराइल ।


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संगम चौधरी.....✍️

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